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Wednesday, 2 July 2014

गज़ल-कुञ्ज (1) प्रणाम (क) प्रियतम-प्रणाम (iii) तुम जाने पहँचाने प्रियतम |


तुम जाने पहंचानेप्रियतम !
पर लगते अनजाने प्रियतम !!


यह सारा जग भटक रहा है -
प्यार तुम्हारा पाने प्रियतम !!


कोकिल भ्रमरों ने पाये मृदु -
स्वर हैं तुम्हें रिझाने प्रियतम !!  



सह ली विरह -वेदना,फिर भी -
गाये मधुर तराने प्रियतम !!
   

तुम्हें याद कर बिता दिए हैं -
कुछ पल आने जाने प्रियतम ||


जग के सारे रिश्ते नाते -
पड़ते हमें निभाने प्रियतम !!


तुम्हें लुभाते प्यार लुटा कर -
"
प्रसून" हँसे सुहाने प्रियतम !!

3 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 03-07-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1663 में दिया गया है
    आभार

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  2. सुन्दर वंदन आराधन कृष्ण गीत

    ReplyDelete
  3. बहुत प्‍यारा गीत...

    ReplyDelete

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